Saturday, July 6, 2019

महाराष्ट्र : गायों के लिए चारा आया, बीजेपी और शिवसेना के लोग खा गए!

“सभी अधिकारियों का पैसा फिक्स है. मैं कोई भी रिकॉर्ड या लेटर दिखा सकता हूं. मैंने जानवरों को एक दिन भी सप्लीमेंट नहीं दिया है, एक चुटकी तक नहीं.”: बीड जिले के कालसाम्बर गांव के पशु कैंप के संचालक गणेश वाघमारे जिन्होने स्वीकार किया कि उन्होंने जानवरों को एक चुटकी भी सप्लीमेंट नहीं दिया.
हाराष्ट्र के बीड इलाके में पशुओं के चारे के साथ घोटाला हुआ है. (फोटो : पीटीआई)



सिद्धांत मोहन

एक हुआ था चारा घोटाला बिहार में, जिसमें बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद नेता लालू प्रसाद यादव का नाम आया था. नाम क्या आया? केस चला. सजा हुई और लालू यादव अब भी सजा काट रहे हैं. वो बात अलग है कि जेल में रहने के दौरान लालू यादव अस्पतालों के ही चक्कर काट रहे हैं.

अब एक चारा घोटाला हुआ है महाराष्ट्र में. यहां भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना की सरकार है. महाराष्ट्र के कई एनजीओ से मिलाकर सूखापीड़ित पशुओं के लिए आए चारे के साथ घपला किया है. और प्रदेश सरकार के मंत्री और भाजपा के नेता कहते हैं कि प्रदेश में कोई घोटाला नहीं हुआ है.


मामले को विस्तार से जानिए 
इस साल मार्च में महाराष्ट्र प्रदेश सरकार ने सूखा पीड़ित किसानों के पशुओं के लिए चारा शेल्टर या कैम्प बनाने का काम शुरू किया था. पूरे प्रदेश में कुल 1,653 कैम्प बनाए जाने की घोषणा हुई. जानवरों के इन कैम्पों में सरकार की तरफ से जानवरों के रहने की व्यवस्था तो की ही जाती है, साथ ही साथ इन पशुओं को चारा-पानी भी मुहैया कराया जाता है.
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सबसे बुरा ये कि ये घटना सूखा पीड़ित किसानों के साथ हुई है.(फोटो : पीटीआई)

इन सभी कैम्पों के संचालन के साथ-साथ जानवरों को चारा-पानी देने की ज़िम्मेदारी प्रदेश के कई छोटे-बड़े एनजीओ ने ली. “इंडिया टुडे” से बातचीत में एनजीओ से जुड़े इन कैम्प संचालकों ने स्वीकारा है कि जानवरों को दिए जाने वाले चारे में उन्होंने घपला किया है. इन चारा कैम्प के नियम के अनुसार बड़े पशुओं को रोजाना 18 किलो चारा, और छोटे पशुओं को 9 किलो चारा खिलाया जाना होता है. लेकिन कैम्प संचालकों ने कहा है कि वे बड़े जानवरों को 12 किलो और छोटे जानवरों को 6 किलो चारा ही देते हैं.
कहां का है मामला?
महाराष्ट्र के बीड जिले का. पूरे प्रदेश में सूखे से सबसे ज्यादा प्रभावित. यहीं के पशु सबसे ज्यादा परेशान. और इसी जिले में प्रदेश सरकार ने सबसे ज्यादा कैम्प बनवाए हैं. बीड में महाराष्ट्र सरकार ने लगभग 950 कैम्प कमीशन किये थे, जिसमें से लगभग 900 बन सके. मौजूदा वक़्त में लगभग 550 चारा कैम्प बीड जिले में चालू हालत में हैं.





गणेश वाघमारे जिन्होने स्वीकार किया कि उन्होंने जानवरों को एक चुटकी भी सप्लीमेंट नहीं दिया.

बीड जिले के कालसाम्बर गांव के पशु कैंप के संचालक गणेश वाघमारे ग्राम पंचायत सदस्य हैं और शिवसेना सदस्य हैं. वाघमारे ने खुफिया कैमरे पर बात करते हुए वाघमारे ने स्वीकार किया कि पशुओं के लिए आए चारे के रिकॉर्ड में घपले और गायों को कम चारा खिलाने की बात स्वीकार की.
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वाघमारे ने बताया है,
“सभी अधिकारियों का पैसा फिक्स है. मैं कोई भी रिकॉर्ड या लेटर दिखा सकता हूं. मैंने जानवरों को एक दिन भी सप्लीमेंट नहीं दिया है, एक चुटकी तक नहीं.”
वाघमारे ने आगे बताया,
“बड़े जानवरों को 18 किलो और छोटे जानवरों को 9 किलो चारा देने का प्रावधान है, लेकिन मैं सिर्फ 12 और 6 किलो चारा ही देता हूं.”
वाघमारे ने इंडिया टुडे को रिकॉर्ड भी दिखाया, जिसमें उन्होंने पशुओं को खिलाए जाने वाले चारे की मात्रा बढ़ा दी थी. वाघमारे ने आगे कहा,
“मैंने लोग रखे हुए हैं जो इस आधिकारिक रिकॉर्ड पर दस्तखत करते हैं. और देखिए, सभी दस्तखत के बाद अंगूठों के निशान भी हैं. क्योंकि 99 प्रतिशत किसान बेवकूफ होते हैं.”
वाघमारे जैसे स्थानीय नेताओं की तरह बहुत सारे नेताओं ने इसे 10 से 15 कैम्प लगा रखे हैं. हर कैम्प में लोकल ग्रामीणों का नाम बतौर पार्टनर शामिल है. और ऐसे सभी कैम्पों में कामकाज का ढर्रा एक ही है.





एक और चारा कैम्प के संचालक मुकुंद रोहिते ने बताया है कि वे जानवरों की फर्जी संख्या कैसे बनाते हैं.

बीड के ही दूसरे गांव अहेर वडगांव में भी यही देखने को मिला. यहां भी संचालक मुकुंद रोहिते ने स्वीकार किया कि रोज़ाना रिकार्ड्स में हेरफेर कर रहे हैं, जिससे पशुओं के लिए आने वाले फंड का इस्तेमाल अपने इस्तेमाल के लिए हो सके.
“हमें चारे और बाकी चीज़ों की संख्या रिकॉर्ड में बढ़ाकर दिखाना पड़ता है. हमें रिकॉर्ड में दिखाना पड़ता है कि हर फैमिली में 4-5 सदस्य हैं और अगर एक आदमी के पास पांच जानवर हैं, तो एक परिवार में लगभग बीस जानवर हो रहे हैं.”
बातचीत में मुकुंद रोहिते ने यह भी स्वीकार किया कि जांच के दौरान वे अधिकारियों को घूस खिलाते हैं. मुकुंद रोहिते ने महाराष्ट्र की प्रदेश सरकार का ज़िक्र करते हुए कहा कि इस मामले में असल तार तो महाराष्ट्र सरकार तक जुड़े हुए हैं.





गोरख शिंगन ने बताया है कि कैसे शिवसेना के स्थानीय नेता की मदद से वे छापे के लिए आई टीमों को मैनेज करते हैं.

बीड के ही एक अन्य गांव कोलारवाड़ी में पशुओं का चारा कैम्प चलाने वाले गोरख शिंगन ने भी ऐसी ही रणनीति की बात की. ऐसे चारा कैम्पों के रिकॉर्ड की बात करते हुए गोरख ने कहा-
“हमारे पास सभी गांव वालों के रिकॉर्ड हैं. और ज़रुरत पड़ने पर हम आसानी से दिखा सकते हैं कि हमारे जिम्मे 2000 जानवर हैं. जांच होने पर भी कोई दिक्कत नहीं होगी. जिला प्रमुख सबकुछ मैनेज कर लेंगे.”
मैनेज कर लेंगे? कैसे? गोरख का मतलब शिवसेना के एक स्थानीय नेता से है. इस नेता ने पिछले महीने ही जांच टीम का विरोध किया, जब जांच टीम चारा कैम्प के खिलाफ मिली शिकायत के आधार पर छापा डालने पहुंची.
क्या है सरकार का रुख?
वही. जांच करेंगे और कार्रवाई करेंगे मार्का रुख. महाराष्ट्र के राहत एवं पुनर्वास मंत्री सुभाष देशमुख ने कहा कि सभी चारा कैम्प नियमों को ध्यान में रखकर आवंटित किये गए हैं, और सभी “सही तरीके से चल रहे हैं.”
देशमुख ने कहा-
“कुछ चारा कैम्पों में मिली अनियमितताओं के खिलाफ हम कार्रवाई कर रहे हैं. कुछ केस ऐसे हो सकते हैं, जहां कुछ गड़बड़ियां हुई हों. अगर कहीं गलत हो रहा है, तो हम उनके खिलाफ कार्रवाई करेंगे.”
महाराष्ट्र्र के कृषि मंत्री सदाभाऊ खोटे ने भी इस मामले पर बात की. उन्होंने कहा कि बाकी सभी कैम्प में होने वाली गड़बड़ियों के लिए एक कैम्प को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है.
“चारा कैम्प उन्हीं लोगों को आवंटित किया गया है, जिनके पास उन्हें चलाने की क्षमता है. एक कैम्प में गड़बड़ी हो रही, इसके लिए हम सभी कैम्पों को दोष तो नहीं दे सकते हैं. ये लाखों रुपए के पशुधन का मामला है. जिन कैम्पों के खिलाफ शिकायतें मिली हैं, हमने उनके खिलाफ जांच के आदेश दे दिए हैं. अगर ऐसी और शिकायतें आती हैं, तो हम उन पर भी कार्रवाई करेंगे.”





महाराष्ट्र भाजपा प्रवक्ता और मुख्यमंत्री की सलाहकार श्वेता शालिनी
भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता श्वेता शालिनी ने दावा किया है कि प्रदेश में किसी तरह का चारा घोटाला नहीं हुआ है. उन्होंने कहा,
“जांच के लिए पांच टीमें बनाई गई हैं. अगर गड़बड़ी मिलती है तो हम कार्रवाई करेंगे. लेकिन हमें प्रदेश का नाम खराब नहीं करने की कोशिश करनी चाहिए. यहां कोई घोटाला नहीं हुआ है.”
इस खबर के बाहर आने के बाद महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उन्होंने कहा-
“ये लोग किसानों की जिंदगी के साथ खेल रहे हैं. सरकार को दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए और उन्हें जेल में डाल देना चाहिए.”
बीड के जिला प्रमुख आस्तीक कुमार पाण्डेय ने कहा कि पैसों का बंटवारा इन पशुओं की गिनती के अनुरूप ही होता है. आस्तीक ने दावा किया कि अगर अनियमितता मिलती है तो वे कार्रवाई करेंगे. जो चारा कैम्प घोटाला करते पकड़े जाएंगे, उन्हें ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा.
इस घटना के सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में यह बात होने लगी है कि एक तरफ तो नरेंद्र मोदी कहते हैं कि न खाऊंगा, न खाने दूंगा, लेकिन महाराष्ट्र की भाजपा यूनिट इस नारे पर भरोसा करने से थोड़ा बच रही है.--Lallantop



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